बटाला 2 फरवरी (अविनाश शर्मा ) : श्री श्री 1008 सतगुरू श्री बावा लाल दयाल महाराज जी का 667 वां जन्मोत्सव बावा लाल जी के महापवित्र स्थान श्री ध्यानपुर धाम में बड़ी ही श्रद्धा व उत्साह से मनाया गया। 31 जनवरी से ही ध्यानपुर धाम में भक्तों का तांता लगना शुरू हो गया। पूरे ध्यानपुर धाम में दूर दूर से आये भक्तों की सेवा करने के लिऐ क्षेत्र के श्रदालुओं में होड़ मची थी। अनेकों तरह के भंडारे लगातार चल रहे थे। सारा वातावरण भक्तमई था। बावा लाल जी के मधुर भजन व जैकारे भक्तों की तरफ से लगाये जा रहे थे। गद्दीशीन महाराज राम सुंदर दास जी के दर्शन दीदार करने के लिऐ संगत में भारी उत्साह था। देर रात महाराज जी ने मंदिर की छत्त से भक्तों को दर्शन व अपना आशीर्वाद दे निहाल किया। मंगलवार की सारी रात महाराज जी के भजन संगत गाती रही व सुबह 2 फरवरी दिन बुधवार को श्री बावा लाल दयाल महाराज जी का जन्मदिन महंत राम सुंदर दास जी ने क मनाया व उस केक का प्रसाद भक्तों में बांटा गया। लगातार चली आ रही परंपरा के अनुसार दोपहर को सभी महाराज की पालकीयां निकाली गई। जिनके दर्शन कर संगत खुद को खुशनसीब मान रही थी। पूरे ध्यानपुर धाम में भारी मेले जैसा माहौल व्याप्त था। बच्चों के मनोरंजन के लिए कई प्रकार के झूले भी लगे हुए थे। ध्यानपुर की शौभा देखने लायक थी। पूरे मंदिर परिसर को रंगबिरंगी रौशनीयों से सजाया गया था। महाराज जी का जन्मदिन मनाने के लिऐ 1 फरवरी को जहां बटाला से हजारों की संख्या में संगत पैदल यात्रा कर श्री ध्यानपुर धाम पहुंची वहीं दूर दूर से महाराज जी के भक्तों ने श्री ध्यानपुर धाम पहुंच नाचते गाते बावा लाल महाराज जी का जन्मदिन मनाया व गद्दी पर माथा टेक महाराज जी का आशीर्वाद प्राप्त किया।
बावा श्री लाल दयाल जी ने देश विदेश में घूम कर जहां वैष्णव धर्म का प्रचार किया वही सहारनपुर के जंगलों में लगभग 100 वर्षों तक रहकर इस धरती को अपने तप से पवित्र किया। प्रतिदिन योग विद्या के माध्यम से सुबह 4 बजे हरिद्वार में गंगा सान के लिए जाते थे जहां पर बादशाह खिजर खान ने अपने अनेक प्रकार से अपनी परीक्षा लेने केबाद स्वयं अपने मंत्रियों के साथ आपके चरणो मे प्रस्तुत हुआ। आजकल यह स्थान बावा लाल के नाम से जाना जाता है। शाही कागजात में आज भी यह दस्तावेज रिकार्ड है। सतगुरु का नियम है कि प्रतिदिन भिक्षा मांग कर ही अंत का सेवन करना, पंजाब में किरण नदी के किनारे कलानौर के पास उन्होने डेरा जमाया हुआ है जहां से कुछदूर महाभारत काल के राजा पुरु के किले में उस समय अराजकता थी। कहा जाता था कि भूत प्रेतो का निवास था। बावा लाल जी ने इस जगह को तपोस्वी बनाया। ऐसा ही एक महान पवित्र नाम योगीराज श्री बावा लाल दयाल महाराज जी का आता हैं। श्री बाबा लाल जी का मुख्य व पवित्र स्थान पंजाब के बटाला- डेरा बाबा नानक रोड पर अड्डा कोटली से करीब 2 किलोमीटर बाई तरफ स्थित है। जिसे बाबा लाल जी के चेले ध्यानदास के नाम पर ध्यानपुर धाम के नाम से जाना जाता है। यह स्थान पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। दूर देशों से भी संगत श्री ध्यानपुर धाम पहुंच नमस्तक होती है।








