देश की खातिर अपनो से बहुत दूर चले जाएंगे कुछ उन्हें भी कर लो याद जो लौट के घर वापिस ना आयेंगे
कीर्ति चक्र विजेता की शहादत को क्षेत्रवासियों ने किया नम आंखों से नमन
उस मां की कोख को सलाम जिसने अजय जैसे वीर सपूत को दिया जन्म-उर्मिला देवी
पठानकोट/नरोट मैहरा 07 जुलाई(तरूण / रोहित) : अफगानिस्तान स्थित भारतीय दूतावास पर हुए फिदायीन हमले को नाकाम करके शहादत का जाम पीने वाले आई.टी.बी.पी की 9 बटालियन के कीर्ति चक्र विजेता हवलदार अजय पठानिया का 14वां श्रद्धांजलि समारोह शहीद सैनिक परिवार सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष कर्नल सागर सिंह सलारिया की अध्यक्षता में गांव कानवां के आर.के रिजॉर्ट आयोजित किया गया।जिसमें कैबिनेट मंत्री लाल चंद कटारूचक्क की पत्नी उर्मिला देवी,बी.एस.एफ हैडक्वार्टर गुरदासपुर के डिप्टी कमांडेंट रजनीश कश्यप, डी.एस.पी मेजर सुमीर सिंह बतौर मुख्य मेहमान शामिल हुए। इनके अलावा शहीद की माता सुदर्शना देवी,पत्नी पूनम पठानियां,बेटा अनिकेत पठानिया, बेटी रिदिमा पठानिया, बहन किरण ठाकुर,भाभी शोभा पठानिया,भतीजा डॉ. नीतीश पठानिया,परिषद के महासचिव कुंवर रविंदर सिंह विक्की,पूर्व कैबिनेट मंत्री मास्टर मोहन लाल,डी.ई.ओ ठाकुर जसवंत सिंह सलारिया,डिप्टी डी.ई.ओ ठाकुर राजेश्वर सलारिया,इंडियन एक्स सर्विस मैन लीग पंजाब व चंडीगढ़ के उपाध्यक्ष कैप्टन फकीर सिंह,परिषद के प्रेस सचिव बिट्टा काटल,ठाकुर भूपिंदर सिंह मुन्ना,एस.डी.ओ नरेश त्रिपाठी, कृषि बैंक के पूर्व डायरेक्टर राज कुमार राजू,शहीद हवलदार अजय पठानिया यूथ क्लब के प्रधान ठाकुर बलवान सिंह, सूबेदार मेजर अवतार सैनी,सूबेदार शक्ति पठानिया, सूबेदार मेजर मदन लाल शर्मा प्रिंसिपल मनीषा शर्मा आदि ने विशेष मेहमान के तौर पर शामिल होकर शहीद को श्रद्धासुमन अर्पित किए।सर्व प्रथम मुख्यातिथि व अन्य मेहमानों ने शहीद के चित्र समक्ष ज्योति प्रज्जवलित तथा पुष्पांजलि अर्पित कर कार्यक्रम का आगाज किया।श्रद्धांजलि समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यातिथि उर्मिला देवी ने कहा कि शहीद हवलदार अजय पठानिया जिन्होंने विदेशी धरती अफगानिस्तान स्थित भारतीय दूतावास को फिदायीन हमले से बचाते हुए अपना बलिदान देकर शूरवीरता का जो इतिहास रचा उनके शौर्य व अद्वितीय कुर्बानी से उनकी यूनिट के जवान तथा देश की भावी पीढ़ी हमेशा प्रेरणा लेती रहेगी।उन्होंने नम आंखों से कहा कि वह इस बहादुर मां की कोख को भी सलाम करती हैं जिन्होंने ऐसा सपूत पैदा कर राष्ट्र की बालिवेदी पर कुर्बान कर दिया।
किस्मत वालों को मिलता है वतन पर कुर्बान होने का सौभाग्य-डिप्टी कमांडेंट
डिप्टी कमांडेंट रजनीश कश्यप ने कहा कि शहादत का गौरव हर किसी की किस्मत में नहीं होता, वो सैनिक खुशकिस्मत है जिसके भाग्य में देश पर कुर्बान होना लिखा होता है।उन्होंने कहा कि हमारा पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान ड्रोन द्वारा हथियार व हेरोइन जैसे नशीले पदार्थ भेजने की नापाक हरकतें आए दिन करता रहता है ताकि हमारे देश की युवा पीढ़ी नशे की दल-दल में फंस जाए मगर सरहद पर तैनात हमारे जवान उनके नापाक इरादों को कभी कामयाब नहीं होने देंगे। कर्नल सागर सिंह सलारिया ने कहा कि एक सैनिक कभी भी रोटी कमाने का सपना लेकर सेना में नहीं जाता बल्कि पारिवारिक संस्कार तथा देशभक्ति का जज्बा उन्हें इस काम के लिए प्रेरित करता है।
वीरता पदक पैसे से नहीं बलिदानों से मिलते हैं- मेजर सुमीर
डी.एस.पी मेजर सुमीर सिंह ने कहा कि वह आज इस श्रद्धांजलि समारोह का हिस्सा बनकर तथा कार्यक्रम में शामिल इतनी संख्या में शहीद परिवारों के दर्शन कर खुद को गौरवाविंत महसूस कर रहे हैं।उन्होंने कहा कि अजय पठानिया के शौर्य व बलिदान को देखकर देश के राष्ट्रपति ने उन्हें कीर्ति चक्र के रूप में जो वीरता पदक दिया वो पैसे से नहीं खरीदा जा सकता उसके लिए बलिदान रूपी कीमत चुकानी पड़ती है।उन्होंने कहा कि एक सैनिक तो बलिदान देकर अपना सैन्य धर्म निभा जाता है,मगर उनके परिजनों का त्याग भी बंदनीय है जो अपनों को खोने का दंश दिल में लिए जीवन बसर कर रहे हैं।
एक दिन नहीं हर दिन हो शहीदों के नाम-डी.ई.ओ
डी.ई.ओ ठाकुर जसवंत सिंह सलारिया ने कहा कि शहीद हवलदार जैसे वीर सैनिकों के बलिदान को साल में एक दिन नहीं बल्कि हर दिन याद करना चाहिए।उन्होंने कहा कि शहीदों के नाम पर बने स्कूल एक मंदिर सम्मान होते हैं इसलिए छात्रों व अध्यापकों का यह फर्ज बनता है के स्कूल के गेट को नमन करके ही अंदर प्रवेश करें।उन्होंने कहा कि स्कूल की असेंबली के बाद छात्रों को शहीदों की वीर
गाथाएं भी सुनाई जाएं। डिप्टी डी. ई.ओ ठाकुर राजेश्वर सलारिया ने कहा कि जिन स्कूलों का नाम अभी तक शहीदों के नाम पर नहीं हुए उसके लिए उनका कार्यालय प्रयत्न शील हैं तथा हम परिषद को यह बचन देते हैं कि हम वीर सैनिकों के अमर बलिदानों की गरिमा को धूमिल नहीं होने देंगे।
प्रेरणास्रोत है अजय जैसे जांबाजों का बलिदान-कुंवर विक्की
कुंवर रविंदर विक्की ने कहा कि अजय जैसे जांबाजों का बलिदान देश की भावी पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है जिन्होंने 14 वर्ष पहले विदेशी धरती पर बहादुरी का परचम फहराते हुए अपना बलिदान देकर देशभक्ति की जो मशाल प्रज्जव लित की,क्षेत्र के युवाओं ने उसे बुझाने नहीं दिया तथा सेना में भर्ती होकर वह आज भी अजय पठानिया को अपना रोल माडल मानते हुए अपने अंदर वतन पर कुर्बान होने का जज्बा पाले हुए हैं।उन्होंने कहा कि शहीद हवलदार अजय पठानिया जैसे जांबाजों की अमूल्य शहादत का राष्ट्र सदैव ऋणि रहेगा।जिन्होंने देश के आने वाले कल के लिए अपना आज कुर्बान कर देशवासियों को यह संदेश दिया है कि एक सैनिक के लिए राष्ट्रहित सर्वोपरी होता है। प्रिंसिपल मनीषा शर्मा ने आए मेहमानों का धन्यवाद किया तथा छात्रों ने देशभक्ति से ओत-प्रोत कार्यक्रम प्रस्तुत कर शहीद को नमन किया।इस मौके पर कैप्टन रछपाल सिंह,सागर सिंह पठानिया,हंस राज,राजेश कुमार,सतपाल अत्री, जगदेव सिंह,ठाकुर नरेश सिंह रिंपी,शक्ति सिंह,जोगिंदर पाल,थाना प्रभारी शोहरत मान,कश्मीर सिंह,तिलक राज,रणबीर सिंह इकबाल सिंह आदि उपस्थित थे।
गर्व है पापा की शहादत पर-रिदिमा
इस अवसर शहीद हवलदार अजय पठानिया की 14 वर्षीय बेटी रिदिमा पठानिया ने नम आंखों से कहा कि जब उनके पापा शहीद हुए उसकी उम्र मात्र सवा महीने की थी,मैं वो अभागी बेटी हूं जिसने अपने पापा को देखा भी नहीं, मगर इन 14 वर्षो में शायद ही कोई ऐसा दिन हो जब उन्हें पापा की याद नही आई हो।उसने कहा कि आज का दिन मेरे लिए स्पेशल होता है, उनके बलिदान दिवस पर जब लोग उनकी शौर्य गाथा सुनाते हैं तो वह खुद को गौरवान्वित महसूस करती है।रिदिमा ने कहा कि उन्हें अपने पापा को खोने का दुख तो बहुत है मगर उनकी शहादत पर गर्व है जो अपना बलिदान देकर उसे एक शहीद की बेटी कहलाने का गौरव प्रदान कर गए।








