Prime Punjab Times

Latest news
ਸੀਨੀਅਰ ਮੈਡੀਕਲ ਅਫਸਰ ਡਾ. ਸ਼ੁਦੇਸ਼ ਰਾਜਨ ਵਲੋਂ ਅਚਨਚੇਤ ਨਿਰੀਖਣ ਖਾਲਸਾ ਕਾਲਜ ਵਿਖੇ ਵਿੱਤੀ ਸਾਖਰਤਾ ਅਤੇ ਸਾਈਬਰ ਸੁਰੱਖਿਆ ਸਬੰਧੀ ਜਾਗਰੂਕਤਾ ਪ੍ਰੋਗਰਾਮ ਕਰਵਾਇਆ ਗਿਆ KMS ਕਾਲਜ ਦੇ ਹੋਟਲ ਮੈਨੇਜਮੈਂਟ ਵਿਭਾਗ ਵੱਲੋਂ ਮਨਾਇਆ ਗਿਆ ਵਿਸ਼ਵ ਖੁਰਾਕ ਦਿਵਸ  ਸਵ: ਡਾਕਟਰ ਮੋਹਨ ਲਾਲ ਧੰਮਣ ਦੀ ਨਿੱਘੀ ਯਾਦ ਨੂੰ ਸਮਰਪਿਤ ਅੱਖਾਂ ਦੀ ਜਾਂਚ ਕੈਂਪ, ਮੈਡੀਕਲ ਜਾਂਚ ਕੈਂਪ ਅਤੇ ਖੂਨਦਾਨ ਕੈਂਪ... DAV ਪਬਲਿਕ ਸਕੂਲ,ਗੜ੍ਹਦੀਵਾਲਾ ਵਿਖੇ ਅਧਿਆਪਕ-ਮਾਪੇ ਮਿਲਣੀ ਦਾ ਸਫ਼ਲ ਆਯੋਜਨ ਖਾਲਸਾ ਕਾਲਜ ਵਿਖੇ ਕੈਂਸਰ ਜਾਗਰੂਕਤਾ ਸੰਬੰਧੀ ਕਰਵਾਇਆ ਗਿਆ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਲੈਕਚਰ श्री रामलीला कमेटी दसूहा ने निकाली राम विवाह संबंधी भव्य शोभायात्रा हाजीपुर चौक दसूहा में धरना रोष प्रदर्शन किया, दसूहा में पंजाब बंद का असर *ਸੀ.ਐਚ.ਸੀ ਭੂੰਗਾ ਵਿਖੇ ਵਿਸ਼ਵ ਮਾਨਸਿਕ ਸਿਹਤ ਜਾਗਰੂਕਤਾ ਦਿਵਸ ਮਨਾਇਆ ਗਿਆ* *ਅਗਰਵਾਲ ਸਭਾ ਵੱਲੋਂ ਮਹਾਰਾਜਾ ਅਗਰਸੈਨ ਜਯੰਤੀ ਸ਼ਰਧਾ ਤੇ ਉਤਸ਼ਾਹ ਨਾਲ ਮਨਾਈ ਗਈ*
ADVERTISEMENT
You are currently viewing शिव की उपासना करने वाले में अगर त्याग ,दया वह संयम नहीं है तो विचार कर लेना की साधना में त्रुटि अवश्य रह गई है : शास्त्री ओम पकाश

शिव की उपासना करने वाले में अगर त्याग ,दया वह संयम नहीं है तो विचार कर लेना की साधना में त्रुटि अवश्य रह गई है : शास्त्री ओम पकाश

बटाला (अविनाश शर्मा)

1 अगस्त : श्री शिव दुर्गा मंदिर प्रेम नगर दारा सलाम बटाला में श्री ओम प्रकाश शास्त्री गंगोत्री उत्तराखंड द्वारा परषोत्तम मास मनाते हुए श्री शिव पुराण, श्रीमद्भागवत और श्री रामायण की मासिक कथा के लगातार 13 वे दिन दिन पर कहा कि पुरुषोत्तम मास में श्रवण की गई शिव महापुराण की कथा पर जीवन में अमल करें। शिव कथा का वर्णन करते उन्होंने कहा कि शिव तपस्या, त्याग, संयम एवं करुणा की मूर्ति हैं। शिव पूजन से प्राणी में उपरोक्त गुण पैदा होते हैं। शिव की उपासना करने वाले में अगर त्याग, दया व संयम नहीं है तो विचार कर लेना चाहिए कि साधना में त्रुटि अवश्य रह गई है। शिव कथा जीवन को स्वच्छ बनाने की प्रेरणा देती है। शिव उपासक बड़े से बड़ा त्याग भी कर सकते हैं। शिव प्रसंग का वर्णन करते हुए ओम प्रकाश शास्त्री ने बताया कि मर्यादा को तोड़ने वाले जीव को शिव स्वीकार नहीं करते। शास्त्री जी ने कहा जब माता सती शिव के वचनों पर विश्वास न करते हुए श्री राम की परीक्षा लेने के लिए सीता का रूप बनाकर गई तो राम जी ने सीता रूप में आई हुई माता सती की चरण वंदना की एवं भगवान शिव की महिमा का वर्णन किया। भगवान शिव को जब सारी घटना का पता चला कि माता सती ने मर्यादा की पालना नहीं किया है तभी शिव ने अपनी अर्धांगिनी सती का मन से परित्याग कर दिया। अगले जन्म में सती ने पार्वती का अवतार लेकर भगवान शिव को प्राप्त किया। शास्त्री जी ने बताया कि शिव पूजन एवं कथा से स्वच्छ विचार एवं शिक्षाएं अपने जीवन में उतारकर जन कल्याण करना चाहिए।इस अवसर पर पंडित शंभू प्रशाद शर्मा, मुख्य सेवादार ब्रिज मोहन गर्ग , विनोद तकियार , वेद प्रकाश शर्मा,काका अबरोल, अशोक महाजन, मनोज पिंका, जुगिंदर पाल,अमन अबरोल, मोदी शर्मा,शमिता गोयल, आशा रानी, ​​डिंपल वर्मा, रेखा शर्मा, संतोष भाटिया, सुनीता वर्मा, उषा, सुमन शर्मा, निर्मल शर्मा, मोनिका शर्मा,, ममता वर्मा, ज्योति शर्मा , शुभ व अन्य महल्ला निवासी उपस्थित थे।