Prime Punjab Times

Latest news
ਭਗਵਾਨ ਪਰਸ਼ੁਰਾਮ ਜਯੰਤੀ ਮੌਕੇ ਬਟਾਲਾ ਵਿੱਚ ਭਗਤੀ ਦਾ ਮਹਾਂਉਤਸਵ — ਸ਼ਾਨਦਾਰ ਪ੍ਰਭਾਤ ਫੇਰੀ ਨਾਲ ਗੂੰਜਿਆ ਸ਼ਹਿਰ ਹੁਸ਼ਿਆਰਪੁਰ ਪੁਲਿਸ ਨੂੰ ਨੂਰਪੁਰ ਜੱਟਾਂ ਕੇਸ 'ਚ ਮਿਲੀ ਵੱਡੀ ਸਫਲਤਾ, ਡਾ.ਅੰਬੇਡਕਰ ਦੇ ਬੁੱਤ ਦੀ ਬੇਅਦਬੀ ਕਰਨ ਵਾਲੇ 3 ਕਾ... ਖ਼ਾਲਸਾ ਕਾਲਜ, ਵਿਖੇ ਸ਼ੁਕਰਾਨਾ ਦਿਵਸ ਮਨਾਇਆ ਗਿਆ *ਲੈਕਚਰਾਰ ਰਛਪਾਲ ਸਿੰਘ ਉੱਪਲ ਨੂੰ ਸਦਮਾ,ਮਾਤਾ ਦਾ ਹੋਇਆ ਦੇ+ਹਾਂ+ਤ* ਪੰਜਾਬ 'ਚ 129 DSPs ਦੇ ਹੇਏ ਤਬਾਦਲੇ, ਹਰਗੁਰਦੇਵ ਸਿੰਘ ਅਤੇ ਸੁਖਪਾਲ ਸਿੰਘ ਦਸੂਹਾ ਤੇ ਟਾਂਡਾ ਦੇ ਹੋਣਗੇ ਨਵੇਂ DSP ਡਿਪਟੀ ਕਮਿਸ਼ਨਰ ਨੇ ਜ਼ਿਲ੍ਹੇ ‘ਚ ਚੱਲ ਰਹੀਆਂ ਸਕੀਮਾਂ, ਪ੍ਰੋਗਰਾਮਾਂ ਅਤੇ ਵਿਕਾਸ ਪ੍ਰੋਜੈਕਟਾਂ ਦੀ ਕੀਤੀ ਸਮੀਖਿਆ ਡੀਏਵੀ ਪਬਲਿਕ ਸਕੂਲ ਗੜਦੀਵਾਲਾ ਦੇ ਵਿਦਿਆਰਥੀਆਂ ਵੱਲੋਂ ਖੇਡਾਂ ਵਿੱਚ ਸ਼ਾਨਦਾਰ ਪ੍ਰਦਰਸ਼ਨ,ਪ੍ਰਿੰਸੀਪਲ ਵੱਲੋਂ ਸਨਮਾਨਿਤ ਖਾਲਸਾ ਕਾਲਜ ਵਿਖੇ ਐਨ.ਐੱਸ.ਐੱਸ.ਯੂਨਿਟ ਵੱਲੋਂ 'ਠੋਸ ਕਚਰਾ ਪ੍ਰਬੰਧਨ' ਵਿਸ਼ੇ ’ਤੇ ਲੈਕਚਰ ਕਰਵਾਇਆ ਗਿਆ ਭਾਈ ਸੁੱਖਾ ਸਿੰਘ ਭਾਈ ਮਹਿਤਾਬ ਸਿੰਘ ਯਾਦਗਾਰੀ ਪਾਰਕ ਨੂੰ ਬਚਾਉਣ ਲਈ ਗਵਰਨਰ ਪੰਜਾਬ ਨੂੰ ਦਿੱਤਾ ਮੰਗ ਪੱਤਰ *ਇਤਿਹਾਸਕ ਨਗਰ ਬਟਾਲਾ ਦੇ ਵਿਕਾਸ ਨੂੰ ਵੱਡਾ ਹੁਲਾਰਾ, ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਭਗਵੰਤ ਸਿੰਘ ਮਾਨ ਵੱਲੋਂ 177 ਕਰੋੜ ਰੁਪਏ ਦੇ ਪ੍ਰਾਜੈ...
ADVERTISEMENT
You are currently viewing शिव की उपासना करने वाले में अगर त्याग ,दया वह संयम नहीं है तो विचार कर लेना की साधना में त्रुटि अवश्य रह गई है : शास्त्री ओम पकाश

शिव की उपासना करने वाले में अगर त्याग ,दया वह संयम नहीं है तो विचार कर लेना की साधना में त्रुटि अवश्य रह गई है : शास्त्री ओम पकाश

बटाला (अविनाश शर्मा)

1 अगस्त : श्री शिव दुर्गा मंदिर प्रेम नगर दारा सलाम बटाला में श्री ओम प्रकाश शास्त्री गंगोत्री उत्तराखंड द्वारा परषोत्तम मास मनाते हुए श्री शिव पुराण, श्रीमद्भागवत और श्री रामायण की मासिक कथा के लगातार 13 वे दिन दिन पर कहा कि पुरुषोत्तम मास में श्रवण की गई शिव महापुराण की कथा पर जीवन में अमल करें। शिव कथा का वर्णन करते उन्होंने कहा कि शिव तपस्या, त्याग, संयम एवं करुणा की मूर्ति हैं। शिव पूजन से प्राणी में उपरोक्त गुण पैदा होते हैं। शिव की उपासना करने वाले में अगर त्याग, दया व संयम नहीं है तो विचार कर लेना चाहिए कि साधना में त्रुटि अवश्य रह गई है। शिव कथा जीवन को स्वच्छ बनाने की प्रेरणा देती है। शिव उपासक बड़े से बड़ा त्याग भी कर सकते हैं। शिव प्रसंग का वर्णन करते हुए ओम प्रकाश शास्त्री ने बताया कि मर्यादा को तोड़ने वाले जीव को शिव स्वीकार नहीं करते। शास्त्री जी ने कहा जब माता सती शिव के वचनों पर विश्वास न करते हुए श्री राम की परीक्षा लेने के लिए सीता का रूप बनाकर गई तो राम जी ने सीता रूप में आई हुई माता सती की चरण वंदना की एवं भगवान शिव की महिमा का वर्णन किया। भगवान शिव को जब सारी घटना का पता चला कि माता सती ने मर्यादा की पालना नहीं किया है तभी शिव ने अपनी अर्धांगिनी सती का मन से परित्याग कर दिया। अगले जन्म में सती ने पार्वती का अवतार लेकर भगवान शिव को प्राप्त किया। शास्त्री जी ने बताया कि शिव पूजन एवं कथा से स्वच्छ विचार एवं शिक्षाएं अपने जीवन में उतारकर जन कल्याण करना चाहिए।इस अवसर पर पंडित शंभू प्रशाद शर्मा, मुख्य सेवादार ब्रिज मोहन गर्ग , विनोद तकियार , वेद प्रकाश शर्मा,काका अबरोल, अशोक महाजन, मनोज पिंका, जुगिंदर पाल,अमन अबरोल, मोदी शर्मा,शमिता गोयल, आशा रानी, ​​डिंपल वर्मा, रेखा शर्मा, संतोष भाटिया, सुनीता वर्मा, उषा, सुमन शर्मा, निर्मल शर्मा, मोनिका शर्मा,, ममता वर्मा, ज्योति शर्मा , शुभ व अन्य महल्ला निवासी उपस्थित थे।

error: copy content is like crime its probhihated