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दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के द्वारा कम्युनिटी हाल खजूरी गेट के पास पांच दिवसीय “श्री राम कथा” का आयोजन

बटाला (अविनाश )

2 दिसंबर : श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्य साध्वी सुश्री सौम्या भारती जी ने बताया कि रामायण एक विलक्षण एवं दिव्यता से परिपूर्ण ग्रंथ है। जिस की कथा मानव जाति को सुजा समृद्धि व आनंद देने वाली है। क्योंकि भगवान राम कल्याण एवं सुख के मूल स्रोत हैं। जो संपूर्ण विघाओं के ईश्वर समस्त भूतों के अधिश्वर तथा साक्षात परमात्मा हैं। जो समस्त जीवो को आत्म ज्ञान द्वारा ईश्वर से जुड़ने की कला सिखाते हैं।

उन्होंने बताया कि भगवान राम जी की कथा में गोता लगाने से मानव को प्रभु की प्राप्ति होती है। लेकिन कथा सुनने व उसमें उतरने में अंतर होता है। सुनना तो सहज है लेकिन उसमें उतरने की कला हमें केवल एक संत ही सिखा सकता है। जिस को भी संत का संग मिला तो वह राम धम का अनुगामी बना। हमारे समस्त वेद शास्त्रा सत्संग की महिमा का व्याख्यान अनेकों प्रकार से करते हैं। एक घड़ी के सत्संग तुलना स्वर्ग की समस्त संपदा से की गई है। संत की कृपा से लकिनी के जीवन में आमूल-चूल परिवर्तन हो गया। संत के चरणों का प्रताप ही ऐसा है कि अहल्या, शबरी जैसे भक्त इसे प्राप्त कर सहज ही भवसागर को पार हो गए। संत के संग से ही मरुस्थल जीवन में बाहर आ जाती है। नीरस जीवन सरस बन जाता है। विकारों से परिपूर्ण हृदय ईश्वरीय भक्ति से भर जाता है।
भगवान शिव भी सत्संग का महत्व मां पार्वती को बताते हुए कहते हैं कि उसकी विद्या, धन, बल, भाग्य सब कुछ निरर्थक है जिसे जीवन में संत की प्राप्ति नहीं हुई। परन्तु वास्तव में सत्संग कहते किसे हैं। सत्य और संग दो शब्दों के जोड़ से मिलकर बना यह शब्द हमें सत्य यानि परमात्मा और संग अर्थात मिलन की और इंगित करता है। परमात्मा से मिलन के लिए संत एक मध्यस्त है। इसलिए हमें जीवन में पूर्ण संत की खोज में अग्रसर होना चाहिए, जो हमारा मिलाप परमात्मा से करवा दें।
कथा में बहुत से गणमान्य सज्जन श्री बरिन्द्र मीत पाड़ा एम.एल.ए. गुरदासपुर,श्री फतेह जंग बाजवा पूर्व विधायक सीनियर लीडर बी.जे.पी., स.सुखदीप सिंह तेजा मेयर कारपोरेशन बटाला,श्री सतीश सरीन डिप्टी मेयर कारपोरेशन बटाला,श्री संजीव शर्मा प्रधान कांग्रेस कमेटी बटाला,श्री गोपाल कृष्ण अग्रवाल,श्री राजीव अग्रवाल,श्री अशोक अग्रवाल,श्री हीरा मनी अग्रवाल,श्री बुद्धिश अग्रवाल,श्री अश्वनी अग्रवाल,श्री राकेश शर्मा,श्री बलविंद्र शर्मा,स्वामी रंजीतानंद जी, साध्वी शंकरप्रीता भारती जी उपस्थित थे। अन्य साध्वी बहनों ने सुमधुर भजनों के गायन से उपस्थित भगवत प्रेमियों को आनंद विभोर किया। कथा का समापन विध्वित प्रभु की आरती से किया गया