जुगियाल 20 नवंबर (हैप्पी)
: रणजीत सागर बांध परियोजना की झील के पंजाब के हिस्से में फैली 35 प्रतिशत झील में मछली पकड़ने का ठेका ऐक बार फिर हिमाचल के ठेकेदार आफ़ताब के हाथ लगा। यह ठेका आफ़ताब ने आन लाइन बोली के दौरान हासिल किया। ग़ौरतलब है कि 11 नवंबर को जल संसाधन विभाग पंजाब की ओर से पंजाब के हिस्से में जो लगभग कुल झील का 35 प्रतिशत बनता है में मछली पकड़ने का ठेका निकाला था जिसे 18 नवंबर तक भरना था। जिसे रणजीत सागर बांध परियोजना के प्रोजेक्ट डीवीजन से हासिल किया जा सकता था। इस में 6 लाख 60 हज़ार सिक्योरिटी रखी गई थी। यह परिक्रिया 19 नवंबर सांय 5 बजे तक पूरी करनी थी। जिसे पूरा कर लिया है इस सारी प्रक्रिया में जल की रानियाँ एक साल के लिए 1 करोड़ 37 लाख 93 हज़ार 407 रुपए में आफ़ताब के हाथ लगी।
इस ठेके में ठेकेदार को 50 प्रतिशत राशि तीन दिन के अंदर जमा करवानी होगी तथा बाक़ी 50 प्रतिशत राशि दो भागों में अगले दो माह के भीतर जमा करवानी होगी। इस के इलावा नामित “नो फिशिंग जोन” में मछली पकड़ने की गतिविधियाँ सख्ती से प्रतिबंधित हैं बांध जलाशय क्षेत्र, जैसा कि परियोजना अधिकारियों द्वारा परिभाषित किया जाएगा। मछली पकड़ने का संचालन केवल दो निर्दिष्ट लैंडिंग से ही किया जाएगा केंद्र: फंगोटा और चामरोर। सभी मछुआरों को निर्दिष्ट का अनुपालन करना होगा।
इन केंद्रों तक आने-जाने का मार्ग।सभी मछली पकड़ने वाली नौकाओं को प्रस्थान करना होगा और निर्दिष्ट लैंडिंग केंद्रों पर वापस लौटना होगा। अनिवार्य सुरक्षा जांच और जनशक्ति, पकड़ी गई मछली का सटीक रिकॉर्ड रखना और नियमों का अनुपालन।मछली पकड़ने की अनुमति केवल दिन के उजाले के दौरान, सूर्योदय से सूर्यास्त तक ही दी जाएगी।परियोजना अधिकारी मछली पकड़ने के संबंध में अतिरिक्त दिशानिर्देश जारी करने का अधिकार सुरक्षित रख सकते है। सुरक्षा आकलन के आधार पर नावें और परिचालन प्रतिबंध।प्रत्येक मछली पकड़ने वाली नाव समुद्र में चलने लायक होनी चाहिए और कम से कम चार जिंदगियों से सुसज्जित होनी चाहिए और चार लाइफजैकट ठेकेदार के खर्च पर उपलब्ध कराने होंगे।
अंतर्देशीय पोत अधिनियम, 2021 के तहत सुरक्षा नियम के तहत परियोजना प्राधिकरण अप्रत्याशित कारणों से मछली पकड़ने की गतिविधियों को अस्थायी रूप से निलंबित कर सकता है।परिस्थितियाँ, जैसे कि बढ़ता जल स्तर, सुरक्षा खतरे, या कोई अन्य उचित आवश्यक समझे जाने वाले कारण।मछली प्रबंधन और संरक्षण से संबंधित सभी निर्णय विवेक पर होंगे।पंजाब मछली पालन अधिनियम, 1914 के तहत सभी लागू नियम और कोई भी प्रासंगिक राज्य के कानून मछली पकड़ने की प्रथाओं को नियंत्रित करेंगे। उल्लंघन के लिए दंड निर्धारित किया जाएगा। संभावित जुर्माने सहित उल्लंघन की प्रकृति और गंभीरता के अनुसार कैद होना। मुख्य अभियंता सुरक्षा का अनुपालन न करने पर जुर्माना लगा सकते हैं। जमा, नियम और विनियम, जिसमें निलंबन या रद्दीकरण शामिल हो सकता है।
मछली पकड़ने के गियर विशिष्टताओं में गिल नेट:
अधिकतम लंबाई 50 मीटर, अधिकतम गहराई 3 मीटर, जाल का आकार 3 इंच।हुक और लाइन: 50 मीटर और 50 हुक की अधिकतम लंबाई वाली एक लंबी लाइन जीवित चारे की अनुमति नहीं है।
कास्ट नेट:
अधिकतम व्यास 5 मीटर और जाल का आकार 3 इंच का होगा।प्रति दिन मछली पकड़ने की गतिविधियों में संलग्न मछुआरों की अधिकतम संख्या नहीं होगी 100 से अधिक। एक सीमा के साथ प्रतिदिन 50 से अधिक गिल जाल और नावें तैनात नहीं की जा सकतीं। प्रति नाव या गिल नेट में दो व्यक्ति होने चाहिए, ठेकेदारों को नियोजित मछुआरों का एक व्यापक दैनिक रजिस्टर रखना होगा,यह सुनिश्चित करना कि सभी के पास संबंधित प्राधिकारियों द्वारा जारी वैध मछली पकड़ने का लाइसेंस है।इस मौक़े पर आफ़ताब ने बताया कि उनके पास पूरे हिमाचल की सप्लाई है तथा भाखड़ा और कोल बांध झील का ठेका भी उनके पास ही हैं। उन्होंने बताया कि वह यहाँ 50 से 60 व्यक्तियों को रोजगार दे कर दी गई पूरी हिदायतों अनुसार कार्य करेंगे।
कमल कृष्ण हैप्पी।
फ़ोटो : ठेकेदार आफ़ताब, पंजाब के हिस्से की रणजीत सागर झील।








