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मुक्तेश्वर धाम पर धूमधाम से मनाया शिवरात्रि के पहले दिन का महोत्सव

होशियारपुर 26 फरवरी (कमल कृष्ण हैप्पी) 

जंगमो द्वारा किया शुभ विवाह

: शाहपुर कंडी बांध प्रशासन की ओर से मुक्तेश्वर धाम के मुख्य मंदिर की गुफा को बचाने के बाद किये गये निर्माण के बाद मुक्तेश्वर धाम प्रबंधक कमेटी की ओर से कमेटी के अध्यक्ष भाग सिंह की अध्यक्षता में इस वर्ष के शिवरात्रि महोत्सव का पहला दिन बड़ी धूमधाम से मनाया गया। पहले दिन मंदिर में जंगमो द्वारा शिव विवाह किया गया तथा बाहर से आए हुए कलाकारों ने भगवान शिव और माता पार्वती का स्वरूप धारण कर सारी रात जागरण कर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस मौके पर मंदिर के मुख्य पुजारी हरि कृष्ण शास्त्री ने बताया कि महाशिवरात्र‍ि हिन्दुओं का एक बड़ा धार्मिक त्योहार है जिसे हिन्दू धर्म के प्रमुख देवता महादेव अर्थात शिवजी के विवाह के रूप में मनाया जाता है। महाशिवरात्र‍ि का पर्व फाल्गुन मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। इस दिन शिवभक्त एवं शिव में श्रद्धा रखने वाले लोग व्रत-उपवास रखते हैं और विशेष रूप से भगवान शिव की आराधना करते हैं।: शिवपुराण के अनुसार भगवान शिव सभी जीव-जंतुओं के स्वामी एवं अधिनायक हैं। ये सभी जीव-जंतु, कीट-पतंग भगवान शिव की इच्छा से ही सब प्रकार के कार्य तथा व्यवहार किया करते हैं।

उन्होंने बताया कि शिवपुराण के अनुसार भगवान शिव वर्ष में 6 मास कैलाश पर्वत पर रहकर तपस्या में लीन रहते हैं। उनके साथ ही सभी कीड़े-मकौड़े भी अपने बिलों में बंद हो जाते हैं। उसके बाद 6 मास तक कैलाश पर्वत से उतरकर धरती पर श्मशान घाट में निवास किया करते हैं। इनके धरती पर अवतरण प्राय: फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को हुआ करता है। अवतरण का यह महान दिन शिवभक्तों में ‘महाशिवरात्रि’ के नाम से जाना जाता है।
पौराणिक मान्यताएं के अनुसार महाशिवरात्र‍ि को लेकर भगवान शिव से जुड़ीं कुछ मान्यताएं प्रचलित हैं। ऐसा माना जाता है कि इस विशेष दिन ही ब्रह्मा के रुद्र रूप में मध्यरात्र‍ि को भगवान शंकर का अवतरण हुआ था। वहीं यह भी मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव ने तांडव नृत्य कर अपना तीसरा नेत्र खोला था और ब्रह्माण्ड को इस नेत्र की ज्वाला से समाप्त किया था। इसके अलावा कई स्थानों पर इस दिन को भगवान शिव के विवाह से भी जोड़ा जाता है और यह माना जाता है कि इसी पावन दिन भगवान शिव और मां पार्वती का विवाह हुआ था।


वहीं यह भी मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव ने तांडव नृत्य कर अपना तीसरा नेत्र खोला था और ब्रह्माण्ड को इस नेत्र की ज्वाला से समाप्त किया था। इसके अलावा कई स्थानों पर इस दिन को भगवान शिव के विवाह से भी जोड़ा जाता है और यह माना जाता है कि इसी पावन दिन भगवान शिव और मां पार्वती का विवाह हुआ था।
रात्रि जागरण के बाद शिवरात्रि वाले दिन सुबह 4 बजे श्रद्धालुओं ने नई बनी गुफा के ज़रिए लाइनों में लग कर मंदिर में जाकर जलाभिषेक किया। इस मौके पर कई लंगर कमेटियों की ओर से श्रद्धालुओं के लिए अलग अलग तरह के पकवानों से लंगर सेवा की। इस मौके पर भीम सिंह, अंकुश तनवल , सुरेंद्र, रमन, परशोतम, कुलदीप, जगदीश, संजीव, मुनीश, सुमित, गोपाल, दर्पण, गौरव, मणि के अलावा अन्य सदस्य मौजूद थे।
फ़ोटो 1 शिवलिंग का जलाभिषेक करते हुए कलाकार।
फ़ोटो 2 लाइनों के ज़रिए गुफा से मुख्य मंदिर को जाते लोग।
फ़ोटो 3 उपस्थित श्रद्धालु।

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