ईश्वर कृपा से मानव जीवन मिला है,जिस प्रभु ने इतनी सुंदर सृष्टि रची है,उस प्रभु को कभी नहीं भूले : आनंदमूर्ति गुरु मां
बटाला 30 जून (अविनाश शर्मा ) आनंदमूर्ति गुरु मां के एक संदेश में बताया के मनुष्य के जीवन में ऐसा अगर अवसर ना आए जिस अवसर में वह भगवन भजन करें । ईश्वर कृपा से मानव जीवन मिला और उस मानव जन्म में हमारे सारधिकता यह है के जिसने इस शरीर को पैदा किया है जिसने यह रूप बनाया है, जिस प्रभु ने इतनी सुंदर सृष्टि रची है उस प्रभु को कभी भी भूले नहीं। परमात्मा क्या है यह भी खोज का विषय है हमारे तीर्थ स्थान किसी न किसी ऋषि महात्मा की तप स्थल हैं चाहे वो वह भगवान परशुराम, विशिष्ट जी महाराज, ऋषि पराशर जी हों जहां-जहां ऋषियों ने तप किया वह स्थान तीर्थ हो गए । जहां बैठकर परशुराम जी तप करते हैं देवी का दर्शन प्राप्त करते हैं वह हमारे लिए जागृत तीर्थ स्थान हो जाता है। जिस स्थान पर बैठ के किसी ने महादेव की उपासना की है महादेव और शक्ति में कोई भेदभाव नहीं कह सकते एक ही बात है एक इस्त्री एक पुरुष। पूरे विश्व में स्त्री रूप में उपासना की गई है तो वह भारत ही है, अगर स्त्री को देवी कहां है तो वह भी भारत ही है, अगर स्त्री को पुजिया कहा गया तो वह भी भारत ही है और महादेव स्वयं अपने मुख से देवी तुम मेरी शक्ति हो और जैसे शक्ति और शिव के मिलने से सृष्टि होती है उसी में हमारा शरीर है। यह जो शरीर बना है पांच तत्व । यह प्रकृति शक्ति के द्वारा बनी है। इसी देह में जो चेतनने तत्व हैं वही शिव हैं । शिव ऐसा नहीं कि किसी पहाड़ी जां मंदिर में छुप के बैठे हैं वहां पर शिवलिंग होता है। लिंग शब्द का अर्थ होता है चिन्ह। जिन लोगों को संस्कृत जा हिंदी भाषा का ज्ञान नहीं वह इसका अर्थ और ही कर लेते हैं वह मानव शरीर के अंग के साथ जोड़ देते हैं। लिंग शब्द का अर्थ होता है सिंबल जैसे तिरंगा हमारे भारत का सिंबल है तिरंगे में भारत नहीं गुस्सा होगा पर तिरंगा देखते ही हम पहचानते हैं की यह हमारे भारत देश का राष्ट्रीय ध्वज है उसको देखते ही सैनिक सलूट मारता है एक स्पोर्ट्स पर्सन जीते तो ऊंचे उठते तिरंगे को लेकर राष्ट्रीय गान को सुनकर उसकी छाती चौड़ी हो जाती है ऐसे ही शिव तत्व का जो सिंबल है उसी को हम लिंग कहते हैं और शिव शब्द का अर्थ है जो कल्याण करता है।








