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LATEST.. जिला मजिस्ट्रेट की ओर से जिले में गेहूं की नाड़ व फसलों के अवशेषों को आग लगाने पर लगाई गई पाबंदी

जिला मजिस्ट्रेट की ओर से जिले में गेहूं की नाड़ व फसलों के अवशेषों को आग लगाने पर लगाई गई पाबंदी

सांय 7 बजे से सुबह 10 बजे तक कंबाइनों से गेहूं काटने पर भी लगाई पाबंदी

होशियारपुर, 28 मार्च(ब्यूरो) : डिप्टी कमिश्नर-कम-जिला मजिस्ट्रेट अपनीत रियात ने फौजदारी संहिता 1973(1974 का एक्ट नंबर 2) की धारा 144 के अंतर्गत प्राप्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए जिले में गेहूं की नाड़ व फसलों के अवशेषों को आग लगाने पर पाबंदी लगा दी है। जारी आदेशों में उन्होंने सांय 7 बजे से सुबह 10 बजे तक कंबाइनों के साथ गेहूं काटने पर भी पाबंदी लगा दी है। यह आदेश 31 मई                                                                                        तक लागू रहेंगे।
जिला मजिस्ट्रेट ने कहा कि 1 अप्रैल 2022 से गेहूं की कटाई का सीजन शुरु हो जाएगा व यह आम देखने में आया है कि गेहूं को काटने के लिए कंबाइने 24 घंटे काम करती हैं। उन्होंने कहा कि यह कंबाइने रात के समय ओस पडऩे के कारण गीली हुई गेहूं को काट देती हैं। इस तरह गेहूं में नमी सरकार की निर्धारित स्पैसिफिकेशन से ऊपर होती है व खरीद एजेंसियां गेहूं को खरीदने में असमर्थ होती है, जिससे किसानों को गेहूं बेचने में बिना वजह मंडियों में परेशान होना पड़ता है।
अपनीत रियात ने कहा कि यह भी देखने में आया है कि गेहंूं की कटाई के बाद नाड़ के अवशेषों को संबंधित मालिकों की ओर से आग लगा दी जाती है, जिससे नुकसान होने की संभावना बनी रहती है। उन्होंने कहा कि हवा में धुएं के साथ प्रदूषण फैलता है, जिससे सांस की बीमारियां हो सकती है। उन्होंने कहा कि नाड़ के अवशेषों को आग लगाने से जमीन का उपयोगी जीवक मादा जो कि जमीन के लिए बहुत लाभदायक होता है, का भी नुकसान हो जाता है। इसके अलावा खेत के आस-पास खड़ी फसल या गांव में आग लगने का भी डर रहता है व सडक़ के पास अवशेषों को आग लगाने से यातायात में भी विघ्न पैदा होता है और हादसे का डर बना रहा है। उन्होंने कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ  नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

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