प्राची ने चाचा को फोन पर बताया, जिस बेसमेंट में ठहराया वहां तो बैठने की भी जगह नहीं
पठानकोट 25 फरवरी (ब्यूरो) : यूक्रेन में लगातार बढ़ रहे तनाव को लेकर यहां विश्व का हर देश विदेश अपने नागरिकों को लेकर चिंतित है वहीं, भारत से भी कई लोग यूक्रेन में फसे हुए है। जिन्हें भारत लाने के लिए भारत सरकार को कड़ा इंतजाम करना चाहिए। भारत देश के यहां कई लोग यूक्रेन में फसे होने की आशंका जताई जा रही है, वहीं पठानकोट जिले के भी कई बच्चे यूक्रेन में हालात खराब होने के चलते फस चुके है। पठानकोट जिले के कई ऐसे परिवार भी सामने आए है जिनके बच्चे यूक्रेन में शिक्षा हासिल करने के लिए गए हुए थे। लेनिक स्थिति तनावपूर्ण होने के चलते इन परिवारों के बच्चे वहीं यूक्रेन में फस चुके है। पीड़ित परिवारिक सदस्यों की ओर से उनके बच्चों को जल्द वापिस लाने के लिए भारत सरकार से गुहार भी लगाई गई है। यूक्रेन में फसे बच्चों के परिवारिक सदस्यों से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि उन्होने अपने बच्चों को यूक्रेन में शिक्षा प्राप्त करने के लिए भेजा था। लेकिन किसे पता था कि यूक्रेन के हालत इतने खराब हो जाएंगे और अब उनके बच्चे हालात खराब होने के चलते इधर-उधर अपनी जान बचाने के लिए छिप रहे है। पीड़ित परिवारों ने देश की सरकार से गुहार लगाई है कि उनके बच्चों को सही सलामत वापिस इंडिया लाया जाए।
दिसंबर में गई थी भतीजी यूक्रेन
पठानकोट के धीरा निवासी सुरेश कुमार ने बताया कि उसकी भतीजी प्राची शर्मा यूक्रेन में दिसंबर माह में गई थी और कुछ दिनों से वहां के हालात बिगड़ चुके है और बंमबारी की वजह से बच्चों को सुबह से खाने के लिए भी कुछ नहीं मिल रहा और उनके कमरे के नीचे बनी बेसमेंट में सौ के करीब बच्चों को ठहराया गया है। कहा कि भतीजी ने फोन पर यह भी बताया कि बेसमेंट में जगह कम होने के चलते बैठा भी नहीं जा रहा है और लाइट भी बंद हो चुकी है। सुरेश ने सरकार से मांग की कि भारतीय बच्चों को यूक्रेन से सही सलामत वापिस लाया जाए।
बच्चे काफी डरा हुआ कर रहे हैं महसूस
पठानकोट के रहने वाले व्यक्ति ने बताया कि उनकी लड़की साक्षी शर्मा 5 दिसंबर को यूक्रेन गई थी और हालात इतने खराब हो चुके है कि बच्चे काफी डरा हुआ महसूस कर रहे है। उनकी बच्ची का बीच बीच में फोन भी आ रहा है और पूरी स्थिति से अवगत करवाया जा रहा है। कहा कि फलाइट बंद होने के कारण सभी बच्चे वहीं रूके हुए है।
उनकी भी सरकार से यही विनती है कि बच्चों को जल्द वापिस भारत मंगवाया जाए।
खाने पीने और पानी की बच्चों को नहीं मिल रही सुविधा
पठानकोट निवासी रेखा ने बताया कि उनकी लड़की आंकशा सैनी 5 दिसंबर को यूक्रेन में एमबीसीएस करने के लिए गई थी और 15 दिनों से यूक्रेन के हालात बिगड़ने से उनकी बच्ची भी वहीं फस चुकी है और जिस बेसमेंट में बच्चे रूके हुए है वहां न तो खाने की व्यवस्था हो रही है और न ही पीने के पानी की। जिस कारण उनके बच्चे यूक्रेन में काफी मुश्किल में है।








