Prime Punjab Times

Latest news
ਸੀਨੀਅਰ ਮੈਡੀਕਲ ਅਫਸਰ ਡਾ. ਸ਼ੁਦੇਸ਼ ਰਾਜਨ ਵਲੋਂ ਅਚਨਚੇਤ ਨਿਰੀਖਣ ਖਾਲਸਾ ਕਾਲਜ ਵਿਖੇ ਵਿੱਤੀ ਸਾਖਰਤਾ ਅਤੇ ਸਾਈਬਰ ਸੁਰੱਖਿਆ ਸਬੰਧੀ ਜਾਗਰੂਕਤਾ ਪ੍ਰੋਗਰਾਮ ਕਰਵਾਇਆ ਗਿਆ KMS ਕਾਲਜ ਦੇ ਹੋਟਲ ਮੈਨੇਜਮੈਂਟ ਵਿਭਾਗ ਵੱਲੋਂ ਮਨਾਇਆ ਗਿਆ ਵਿਸ਼ਵ ਖੁਰਾਕ ਦਿਵਸ  ਸਵ: ਡਾਕਟਰ ਮੋਹਨ ਲਾਲ ਧੰਮਣ ਦੀ ਨਿੱਘੀ ਯਾਦ ਨੂੰ ਸਮਰਪਿਤ ਅੱਖਾਂ ਦੀ ਜਾਂਚ ਕੈਂਪ, ਮੈਡੀਕਲ ਜਾਂਚ ਕੈਂਪ ਅਤੇ ਖੂਨਦਾਨ ਕੈਂਪ... DAV ਪਬਲਿਕ ਸਕੂਲ,ਗੜ੍ਹਦੀਵਾਲਾ ਵਿਖੇ ਅਧਿਆਪਕ-ਮਾਪੇ ਮਿਲਣੀ ਦਾ ਸਫ਼ਲ ਆਯੋਜਨ ਖਾਲਸਾ ਕਾਲਜ ਵਿਖੇ ਕੈਂਸਰ ਜਾਗਰੂਕਤਾ ਸੰਬੰਧੀ ਕਰਵਾਇਆ ਗਿਆ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਲੈਕਚਰ श्री रामलीला कमेटी दसूहा ने निकाली राम विवाह संबंधी भव्य शोभायात्रा हाजीपुर चौक दसूहा में धरना रोष प्रदर्शन किया, दसूहा में पंजाब बंद का असर *ਸੀ.ਐਚ.ਸੀ ਭੂੰਗਾ ਵਿਖੇ ਵਿਸ਼ਵ ਮਾਨਸਿਕ ਸਿਹਤ ਜਾਗਰੂਕਤਾ ਦਿਵਸ ਮਨਾਇਆ ਗਿਆ* *ਅਗਰਵਾਲ ਸਭਾ ਵੱਲੋਂ ਮਹਾਰਾਜਾ ਅਗਰਸੈਨ ਜਯੰਤੀ ਸ਼ਰਧਾ ਤੇ ਉਤਸ਼ਾਹ ਨਾਲ ਮਨਾਈ ਗਈ*
ADVERTISEMENT
You are currently viewing पुरुषोत्तम मास बहुत महत्वपूर्ण और पूजा पाठ, मंत्र जाप के लिए शुभ माना जाता है : पंडित शंभू प्रसाद शर्मा

पुरुषोत्तम मास बहुत महत्वपूर्ण और पूजा पाठ, मंत्र जाप के लिए शुभ माना जाता है : पंडित शंभू प्रसाद शर्मा

बटाला (अविनाश शर्मा)

13 जुलाई : आज शिव दुर्गा मंदिर दारा सलाम के पुजारी पंडित शंभू प्रसाद शर्मा जी ने एक भेंट वार्ता में बताया कि हिन्दू पञ्चांग के मुताबिक इस वर्ष जुलाई माह में अधिक मास पड़ रहा है, अर्थात एक हिन्दू माह ज्यादा ।अधिक मास के कारण यह वर्ष 13 महीनों का होगा. सनातन धर्म में अधिक मास बहुत महत्वपूर्ण और पूजा, पाठ, मंत्र जाप एवं कथा इत्यादि के लिये महत्वपूर्ण एवं शुभ माना गया है। 18 जुलाई दिन मंगलवार से अधिक मास प्रारम्भ हो रहा है, इस मास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है क्योंकि इस मास के स्वामी स्वयं भगवान नारायण (विष्णु) हैं, मान्यता है कि इस मास में किये गये धार्मिक कार्य और पूजा पाठ का अधिक (पुण्य) फळ प्राप्त होता है, और गोक्ष की प्राप्ति होती है। विवाह आदि कार्य वर्जित होते हैं। इस मास में एक अमावस्या से दूसरी अमावस्या के बीच सूर्य, संक्रान्ति नहीं होती है। सौर वर्ष और चान्द्र वर्ष में सामन्जस्य स्थापित करने के लिये हर तीसरे वर्ष पन्चांगों में एक चन्द्रमास की वृद्धि कर दी जाती है इसी को अधिमास या मलमास, कहते है.। सौर वर्ष का मान 365 दिन 15 घड़ी 22 पल और 57 विपल है जबकि चान्द्र वर्ष 354 दिन 22 घड़ी 1पल कोर 23 विपल होता है। शास्त्रानुसार हिरण्यकश्यप को मारने के लिये नरसिंह अवतार भी इसी मास में हुआ है। भक्त प्रहलाद की रक्षा के लिये भगवान विष्णु को नरसिंह अवतार लेना पड़ा ।