बटाला, 22 अक्टूबर (अविनाश शर्मा )
: आध्यात्मिक जगत की प्रेरणा स्त्रोत, पूजनीय आनंद मूर्ति गुरु माँ जी के दिव्य सान्निध्य में आश्रम गन्नौर में शाम के पवित्र अवसर पर पर्यावरण शुद्धि एवं धरती माँ की सेवा के उद्देश्य से विशाल पौधारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
सूर्यास्त के समय जब आकाश सुनहरी आभा से नहाया हुआ था, उस पावन घड़ी में गुरु माँ जी ने अपने पावन कर-कमलों से आंवला, हरड़ और बेहड़ा के पौधे रोपकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। गुरु माँ जी की प्रेरणा से सैकड़ों साधकों ने पौधारोपण कर धरती माँ को हरियाली का अमूल्य उपहार अर्पित किया।
मंत्रोच्चार, भजन-कीर्तन और मिट्टी की सुगंध ने पूरे आश्रम वातावरण को अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा और दिव्यता से भर दिया।
अपने आशीर्वचनों में गुरु माँ जी ने कहा —
> “पर्यावरण की शुद्धता केवल बाहरी नहीं होती, यह हमारे अंतर्मन की पवित्रता का प्रतीक है। जैसे हम आत्मा को निर्मल रखते हैं, वैसे ही हमें धरती माँ की पवित्रता के लिए भी कर्म करना चाहिए। पौधे जीवन के प्रतीक हैं, इनकी सेवा ही सच्ची भक्ति है।”
गुरु माँ जी ने यह भी कहा कि पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा और पालन-पोषण करना भी अत्यंत आवश्यक है।
> “जिस प्रकार माँ अपने शिशु की सेवा करती है, उसी प्रकार हमें भी इन पौधों की सेवा करनी चाहिए, क्योंकि ये धरती माँ के पुत्र हैं,” गुरु माँ जी ने कहा।
शाम के इस सुंदर अवसर पर आश्रम में दीपों की ज्योति, हरियाली की महक और भजन-कीर्तन की मधुर ध्वनि ने वातावरण को आनंद, भक्ति और शांति से सराबोर कर दिया। उपस्थित साधकों ने संकल्प लिया कि वे हर वर्ष कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएंगे और उसकी सेवा करेंगे।
कार्यक्रम के अंत में गुरु माँ जी ने सभी श्रद्धालुओं को आशीर्वाद प्रदान करते हुए कहा —
> “जो मनुष्य धरती माँ की सेवा करता है, उसी पर प्रकृति अपनी कृपा बरसाती है। पौधारोपण सबसे महान यज्ञ है, जो मानवता को जीवन देता है।”
कार्यक्रम का समापन शांति पाठ और प्रसाद वितरण के साथ हुआ। संध्या की अलौकिक आभा में पूरा आश्रम गुरु माँ जी के नाम की भक्ति, प्रेम और आनंद की तरंगों से गूंज उठा।








