Prime Punjab Times

Latest news
ਵਿਦਿਅਕ ਸੰਸਥਾਵਾਂ ਦੀ ਤਰੱਕੀ ਲਈ ਐਡਵੋਕੇਟ ਸ. ਹਰਜਿੰਦਰ ਸਿੰਘ ਧਾਮੀ ਦੇ ਯਤਨ ਸ਼ਲਾਘਾਯੋਗ : ਡਾ. ਜਸਪਾਲ ਸਿੰਘ ਖੇਡਾਂ ਵਤਨ ਪੰਜਾਬ ਦੀਆਂ ਜ਼ਿਲ੍ਹਾ ਵਾਲੀਬਾਲ ਪ੍ਰਤੀਯੋਗਤਾ 'ਚ DAV ਪਬਲਿਕ ਸਕੂਲ ਦੇ ਵਿਦਿਆਰਥੀਆਂ ਦਾ ਸ਼ਾਨਦਾਰ ਪ੍ਰਦਰਸ਼ਨ ਸੋਲਿਡ ਵੇਸਟ ਮੈਨੇਜਮੈਂਟ' 'ਤੇ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਲੈਕਚਰ ਦਾ ਆਯੋਜਨ ਗੜ੍ਹਦੀਵਾਲਾ ਚ ਦੁਸ਼ਹਿਰਾ ਉਤਸਵ ਤਿਆਰੀਆਂ ਸ਼ੁਰੂ, ਧਰਮ ਅਤੇ ਅਧਰਮ ਦੇ ਪ੍ਰਤੀਕ ਝੰਡਾ ਕੀਤਾ ਸਥਾਪਿਤ *ਸੀਨੀਅਰ ਮੈਡੀਕਲ ਅਫਸਰ ਡਾ.ਮਨਮੋਹਨ ਸਿੰਘ ਵੱਲੋਂ ਡੇਂਗੂ ਸਰਵੇ ਕਰ ਰਹੀਆਂ ਟੀਮਾਂ ਦਾ ਲਿਆ ਜਾਇਜ਼ਾ* KMS ਕਾਲਜ ਵਿਖੇ ਮੈਡੀਕਲ ਸਾਇੰਸ ਵਿਭਾਗ ਲਈ ਐਂਟਰੈਂਸ ਟੈਸਟ ਆਯੋਜਿਤ ਕਰਵਾਇਆ - ਪ੍ਰਿੰਸੀਪਲ ਡਾ. ਮਾਨਵ ਸੈਣੀ विधायक प्रगट सिंह पंजाब कांग्रेस के नए अध्यक्ष नियुक्त ਕਿਸਾਨਾਂ ਦੀ ਫਸਲ ਦਾ ਦਾਣਾ-ਦਾਣਾ ਖਰੀਦਣਾ ਪੰਜਾਬ ਸਰਕਾਰ ਦੀ ਮੁੱਖ ਤਰਜੀਹ : ਲਾਲ ਚੰਦ ਕਟਾਰੂਚੱਕ DAV ਪਬਲਿਕ ਸਕੂਲ ਦੀ ਵਿਦਿਆਰਥਣ ਪਾਰੀਕਾ ਸ਼ਰਮਾ ਨੇ ਸਟ੍ਰੇਟ ਤਾਈਕਵਾਂਡੋ ਮੁਕਾਬਲੇ 'ਚ ਜਿੱਤਿਆ ਸੋਨ ਤਗਮਾ, ਨੈਸ਼ਨਲ ਲਈ ਹੋ... ਵਿਦਿਆਰਥੀਆਂ ਦੀ ਰਚਨਾਤਮਕ ਪ੍ਰਤਿਭਾ ਨੂੰ ਉਤਸ਼ਾਹਿਤ ਕਰਨ ਲਈ ਅੰਤਰ-ਕਲਾਸ ਰਚਨਾਤਮਕ ਲੇਖਣ ਮੁਕਾਬਲਾ ਕਰਵਾਇਆ
ADVERTISEMENT
You are currently viewing धान की फसल के पौधे बौने ही रहने के कारण किसानों…..

धान की फसल के पौधे बौने ही रहने के कारण किसानों…..

पठानकोट(तरूण/रोहित)

धान की फसल के पौधे बौने ही रहने के कारण किसानों की फसल हो रही बर्बाद।

पठानकोट में लगभग 700 एकड़ धान की फसल पड़ी पीली वह पौधे रहे बोणे,किसानों ने खुद धान की फसल पर चलाया ट्रैक्टर

9,सितंबर : कभी सूखे की मार कभी तेज बारिश जो किसानों की फसल को अपनी चपेट में ले लेती है और इस बार ज्यादा बारिश और ज्यादा गर्मी ने किसानों की धान की फसल का कद छोटा कर दिया है जिसके कारण पठानकोट में करीब 600 से 700 एकड़ जमीन पर लगाई धान की फसल प्रभावित हुई है जिसके चलते किसानों द्वारा अपने इस धान की फसल को अपने हाथों से हल चलाया जा रहा है ऐसा ही कुछ देखने को मिला विधानसभा हल्का भोआ के गांव में जहां पर किसानों द्वारा करीब 5 एकड़ धान की फसल पर हल चला दिया गया क्योंकि यह फसल मौसम की मार के कारण बोनी रह गई है और यही नहीं इसके पत्ते भी पीले होने के कारण धान की फसल का सही पैदावार ना मिलने के कारण किसानों ने खुद अपने हाथों से धान की फसल पर ट्रैक्टर चला दिए- इस बारे में जब किसानों से बात की गई तो उन्होंने कहा कि धान की फसल पर इस बार मौसम की बहुत मार पड़ी है पठानकोट में ज्यादातर धान की फसल बोनी रह गई है या फिर उसके पत्ते पीले हो गए हैं जिस कारण किसानों को अपने हाथों से इस धान की फसल को बर्बाद करना पड़ रहा है जिसके चलते किसानों ने सरकार से मुआवजे की मांग की है।