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मादा भ्रूण या कोई भी लिंग परीक्षण भारत में गैर-कानूनी : सिविल सर्जन डॉ.रुबिन्दर कौर

मादा भ्रूण या कोई भी लिंग परीक्षण भारत में गैर-कानूनी : सिविल सर्जन डॉ.रुबिन्दर कौर

पठानकोट, (अविनाश शर्मा, राज अमृत सिंह) : सिविल सर्जन डॉ रुबिन्दर कौर की अध्यक्षता में मादा भ्रूण हत्या पर एक व्याख्यान का आयोजन किया गया। जिसमें डॉक्टर राजकुमार, डॉक्टर अदिती सलारिया, डॉक्टर सुनीता शर्मा, प्रिया महाजन, जतिन, मास मीडिया अधिकारी विजय ठाकुर सहित पठानकोट के कई समाजसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि तथा स्वास्थ्य कर्मचारी उपस्थित थे । मादा भ्रूण हत्या के बारे में अपने व्याख्यान में डॉक्टर रूपिंदर कौर ने कहा कि माता-पिता अजन्मे मादा बच्चे को गर्भ में ही मार देने का निर्णय सिर्फ इसलिए लेते हैं क्योंकि वे उसे नहीं चाहते, तब इसे मादा भ्रूण हत्या कहा जाता है। यह पिछले कुछ दशकों में काफी बढ़ा है। 1990 में चिकित्सा क्षेत्र में अभिभावकीय लिंग निर्धारण जैसे तकनीकी उन्नति के आगमन के समय से भारत में मादा भ्रूण हत्या को बढ़ावा मिला। हालांकि, इससे पहले, देश के कई हिस्सों में बच्चियों को जन्म के तुरंत बाद मार दिया जाता था। दुःख की बात यह है कि आज भी मादा भ्रूण हत्या घटना सुनने व देखने को मिलती है। भारतीय समाज में, बच्चियों को सामाजिक और आर्थिक बोझ के रुप में माना जाता है इसलिये वो समझते हैं कि उन्हें जन्म से पहले मार देना परिवार के लिए उचित होगा। इसे भारत में एक दंडनीय अपराध माना जाता है, किंतु, तब भी यह उच्च दर पर जारी है। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि महिलाओं के भविष्य के लिये मादा भ्रूण हत्या एक अपराध और सामाजिक आपदा है। लैंगिक भेदभाव की वजह से ही मुख्यत मादा भ्रूण हत्या होती है। इसके ऊपर नियंत्रण के लिये कानूनी शिकंजा होना चाहिये। भारत के सभी नागरिकों द्वारा इससे संबंधित नियमों का कड़ाई से पालन करना चाहिये। इस क्रूरतम अपराध के लिये किसी को भी गलत पाये जाने
पर निश्चित तौर पर सजा मिलनी चाहिये। मादा भ्रूण-हत्या के पीछे कई अवांछित सामाजिक कारण हैं। आज के युग में लड़कियों की सुरक्षा भी एक बड़ा मुद्दा है । मादा भ्रूण हत्या सामान्य तौर पर एक जगंन्य अपराध है। इस अपराध में मुख्य रूप से महिला पीड़ित होती है। दूसरे शब्दों में, अल्ट्रासाउंड स्कैन जैसी लिंग परीक्षण जाँच के बाद जन्म से पहले माँ के गर्भ से लड़की के भ्रूण को समाप्त करने के लिये गर्भपात की प्रक्रिया को मादा भ्रूण हत्या कहते हैं। मादा भ्रूण या कोई भी लिंग परीक्षण भारत में गैर-कानूनी है। तकनीकी उन्नति ने भी मादा भ्रूण हत्या को बढ़ावा दिया है। उन्होनें कहा कि मादा भ्रूण-हत्या ने बहुत गंभीर मामलों को बढ़ावा दिया है। लिंग अनुपात बुरी तरह नीचे गिर गया है । महिला के गर्भ में ही लिंग परिक्षण कर जन्म लेने वाले बच्चे को जन्म से पहले ही मार देना वर्तमान में भारत में गैर कानूनी है। इस घिनोना अपराध को करने के लिए लड़की को महिला के ससुराल पक्ष द्वारा उकसाया जाता है। यह एक सामाजिक अपराध हैं, जिसे रोकना हमारा ही हक है । इस अपराध को रोके और समाज को अच्छा बनाने में मदद करें।